अचानक एक दिन उसने मुझसे कहा
हम बस दोस्त नहीं रह सकते क्या
आगे सब कुछ मुश्किल सा लगता है
हम बस बातें नहीं कर सकते क्या
मेरा बस यही सवाल था फिर उस से
तुम सच में बस दोस्त रह पाओगी क्या
क्या नहीं आएँगी याद तुम्हें वो बातें
वो साथ बिताए हुए लम्हे और वो रातें
हँसते हुए जो गुज़रे थे वो दिन
और वो पल जिसमें हम साथ रोये थे
तुम वो सब कुछ भूल पाओगी क्या
क्या तुम ये भी भूल जाओगी कि
हमने करे थे वादे साथ रहने की
तुम ये दोस्ती में निभा पाओगी क्या
चलो माना कर लेते हैं बस दोस्ती
तुम "हमें" किसी से मिला पाओगी क्या
कोई तो आ ही जायेगा जिंदगी में तुम्हारे
मेरी तरह उस से प्यार निभा पाओगी क्या
जब सब कुछ होगा तुम्हारे पास
हमारी यादों को दिल से निकाल पाओगी क्या
जो सपने देखे थे मेरे साथ तुमने
तुम वो किसी और के साथ पूरे कर पाओगी क्या
अगर किसी दिन रहो तुम बहुत परेशानी में
किसी और बाहों में मुझ जैसा सुकून पाओगी क्या
हर पल करेगा दिल तुम्हारा फिर से मेरे करीब आने का
इस एहसास से इंकार कर पाओगी क्या
जिस दोस्ती की बात कर रही हो तुम
खुद उसे बस दोस्ती तक रख पाओगी क्या
क्योंकि मुझसे नहीं हो पायेगा ये सब
फिर से सब शुरुआत से शुरू करना
ये दिल नहीं चाहता किसी पर आना अब
जो है इसमें उसी को मानेगा ये अपना
अगर फिर भी चाहती हो बस दोस्ती ही रहे बीच हमारे
नहीं होगा ऐतराज़ मुझे इस फैसले से तुम्हारे
बस वो साथ बिताए लम्हे मैं तो नहीं भूल पाऊँगा
शायद दोस्त रह कर भी मैं तुम्हें ही चाहूँगा |