तलाश उनकी निगाहों को थी बेशक ही किसी और की,
मगर मुझसे थीं आ मिलीं वो निगाहें,
शायद गलती थी ये 'वक्त' की,
और जब हुआ उनकी निगाहों को इस गलती का एहसास,
एक पल में चला गया वो कहते हुए,
"तुम थे ही नहीं कभी, मेरे लिए खास"
दिल टूट गया मेरा, आँसू रोके ना रुके,
क्या थी मेरी गलती? क्यों हम एक न हो सकें?
बस एक ही आरज़ू थी दिल में, उनसे पूछ लूँ एक बार,
क्या कभी था भी तुम्हारे दिल में, मेरे लिए कोई प्यार?