ज़िंदा लाश की थकान

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ज़िंदा लाश की थकान

सुना है दुनिया उसे कायर कहती है जो ख़ुदकुशी कर लेते हैं। नहीं… मैं कायर नहीं, बस थक गया हूँ। मैं बस अब सो जाना चाहता हूँ, हमेशा के लिए।

मगर क्या मुझे भी सब कायर कहेंगे? मैं कायर नहीं हूँ। ये मौत भी कितनी मुश्किल से हासिल होती है, पूरी ज़िंदगी की मेहनत के बाद ही मिलती है। मगर अब साँसों का बोझ भी भारी लगता है।

ऐ मौत, तू आ और मुझे ले जा, मैं ख़ुद चल पड़ा तो फ़ैसला लोग कर देंगे, मेरी कहानी नहीं, सिर्फ़ मेरी मौत पढ़ेंगे।


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